आपके लिए ज़रूरी जानकारी

हेपेटाइटिस-बी, डीपीटी, और आईपीवी जैसी वैक्सीन इंजेक्शन के द्वारा दी जाती हैं। इन वैक्सीन को लगाने के बाद उस जगह पर हल्की लाली, सूजन या दर्द होना आम बात है। यह एक सामान्य प्रतिक्रिया है और आमतौर पर 2–3 दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है।

इसका वैक्सीन की गुणवत्ता, सुरक्षा या प्रभाव से कोई लेना-देना नहीं होता।

बच्चे को आराम देने के लिए सूजन वाली जगह पर ठंडे पानी की पट्टी से धीरे-धीरे सिकाई करें और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी गई पैरासिटामोल की खुराक दें। अगर सूजन, दर्द या लाली 3 दिन या उससे अधिक समय तक बनी रहे, या बच्चे को तेज़ बुखार या अधिक परेशानी हो, तो तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं।

अगर बच्चे को सही समय पर टीका लगवा दिया जाए, तो उसका शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। कुछ बीमारियाँ एक खास उम्र में ही हो सकती हैं, इसलिए उसी समय टीका लगवाना ज़रूरी होता है। अगर टीका लगवाने में देरी हो जाए, तो बच्चा अच्छी तरह सुरक्षित नहीं रह पाता और उसे खतरनाक बीमारी होने का खतरा बना रहता है।

हर टीका एक तय उम्र में इसलिए दिया जाता है क्योंकि उसी तय उम्र में उस बीमारी का खतरा सबसे ज़्यादा होता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसका शरीर कुछ बीमारियों से खुद ही लड़ना सीख जाता है। अगर बच्चा वो उम्र पार कर चुका है जब बीमारी सबसे ज़्यादा नुकसान कर सकती थी, तो फिर उस टीके की ज़रूरत नहीं होती।

अगर किसी वजह से कोई टीका छूट गया हो, तो घबराएं नहीं। जितनी जल्दी हो सके, बच्चे को टीका लगवा दे। इसके लिए आप अपने क्षेत्र की आशा या ए.एन.एम. दीदी से बात करें। ध्यान रखें, अगर कोई खुराक छूट जाए तो टीकाकरण की शुरुआत दोबारा करने की ज़रूरत नहीं होती, बस जो टीके बाकी हैं, वही लगवाने होते हैं।

राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम के अनुसार, चाहे बच्चे का जन्म कहीं भी हुआ हो, उसे तीन वैक्सीन — ओ.पी.वी., बी.सी.जी. तथा हेपेटाइटिस-बी — की एक-एक खुराक दी जानी चाहिए।

जी हाँ, आपके बच्चे को एक ही समय पर एक से अधिक टीके लगवाना पूरी तरह से सुरक्षित है। इसका कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ता है और न ही किसी दूसरे टीके का असर कम होता है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार, एक सत्र में एक से अधिक टीकों का लगाया जाना न केवल सुरक्षित है, बल्कि इससे बार-बार टीकाकरण केंद्र जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे समय भी बचता है और टीकाकरण के लिए लाने और ले जाने के लिए होने वाले सफ़र के खर्च की भी बचत होती है।

जी हाँ, ऐसे मामलों में भी बच्चे को टीकाकरण कराना आवश्यक है। अधिकतर बीमारियों (जैसे डिप्थीरिया, रोटावायरस, खसरा आदि) से होने वाली प्राकृतिक संक्रमण के बाद शरीर में बनी प्रतिरक्षा सीमित समय के लिए ही प्रभावी होती है। इसलिए संक्रमण या रोग हो जाने के बावजूद बच्चे को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार सभी प्रस्तावित खुराकें समय पर और नियमित रूप से दिलवाना जरूरी होता है।

जी हाँ, टीकाकरण अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी रोग के प्रसार को रोकने के लिए संबंधित आयु वर्ग के सभी बच्चों और बड़ो को वैक्सीन की खुराक दी जाए। भले ही आपके बच्चे को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सभी खुराकें मिल चुकी हों, फिर भी अभियान के दौरान दी जाने वाली अतिरिक्त खुराक दी जानी चाहिए। यह खुराक अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। साथ ही, यदि किसी अभियान में बच्चे को किसी वैक्सीन की खुराक दी गई है, फिर भी नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार बाकी खुराकों को भी पूरा किया जाना आवश्यक है।

जी हाँ, अगर बच्चे को मामूली बीमारी (जैसे — खांसी, जुकाम, हल्का बुखार, हल्का दस्त या उल्टी आदि) हो, तो उसे टीका लगाया जा सकता है, चाहे वह इंजेक्शन के माध्यम से हो या मुँह द्वारा दी जाने वाली वैक्सीन हो।

लेकिन, अगर बच्चे को बहुत तेज बुखार, गंभीर दस्त, या वह अस्पताल में भर्ती हो तो ऐसी स्थिति में, जब तक उसकी हालत में सुधार न आ जाए, टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए।

1.टीकाकरण के बाद करीब आधे घंटे तक सत्र स्थल पर रुकें, ताकि यदि कोई मामूली दुष्प्रभाव हो तो बच्चे को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।

2. टीकाकरण के बाद , चाहे वैक्सीन मुँह से दी गई हो, तब भी बच्चे को स्तनपान और पूरक आहार देना जारी रखें।

3. जहाँ इंजेक्शन लगाया गया है, उस स्थान पर किसी भी प्रकार का दबाव न डालें, और न ही कोई जड़ी-बूटी लगाएँ।

जी हाँ, अपने बच्चे को टीका अवश्य लगावाना चाहिए। सभी बच्चों का टीकाकरण करवाया जाना चाहिए इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि –

  • चाहे उसका जन्म ऑपरेशन अथवा सामान्य रूप से हुआ हो
  • चाहे उसका जन्म निजी या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अथवा घर पर हुआ हो
  • चाहे उसका जन्म गर्भावस्था के नौ महीना पूरा होने से पहले ही हो गया हो
  • चाहे उसकी माँ किसी रोग से पीड़ित हों
  • चाहे जन्म के समय शिशुओं का वज़न कम हो

इन सभी स्थितियों में भी बच्चे को समय पर और पूरी खुराकों के साथ राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार वैक्सीन दी जानी चाहिए।

अगर आपके बच्चे को पहले टीका नहीं लगाया गया है, तो चिंता न करें — उसे अब भी टीका लगावाया जा सकता है। बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर एक उपयुक्त टीकाकरण योजना तैयार करेंगे। इसलिए, कृपया जल्द से जल्द अपने नज़दीकी डॉक्टर या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, ताकि बच्चे का टीकाकरण करवा कर बच्चे को बीमारियों से सुरक्षित किया जा सके।

टीकाकरण के बाद कुछ बच्चों को हल्का बुखार आना सामान्य बात है। यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया होती है और आमतौर पर 1–2 दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, अगला टीका लगवाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना उचित रहेगा, ताकि वे आपके बच्चे की वर्तमान स्थिति की जांच कर सही सलाह दे सकें।

टीकाकरण बच्चों को कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाता है और उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखता है। चाहे आपके परिवार में पहले किसी ने टीका नहीं लगवाया हो, फिर भी अपने बच्चे को समय पर टीका लगवाना बहुत ज़रूरी है। क्योंकि टीकाकरण से न सिर्फ आपका बच्चा सुरक्षित रहता है, बल्कि यह समाज के अन्य बच्चों और लोगों को भी संक्रामत बीमारियों से बचाने में मदद करता है। यह एक सुरक्षित, प्रभावी और जरूरी उपाय है जो हर बच्चे को दिया जाना चाहिए।

नहीं, टीकाकरण से बांझपन होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। टीके शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए बनाए जाते हैं और इनका उद्देश्य स्वस्थ्य जीवन को सुनिश्चित करना है। बांझपन और टीकाकरण के बीच कोई संबंध नहीं है। यह एक अफवाह है, जिस पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

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